पूर्व-कार्यक्रम
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काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष समारोह (मध्य प्रदेश में जनजातियों का क्रांतिकारी आंदोलन) एवं रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती पर पुस्तक लोकार्पण
- October 24, 2024
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काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष समारोह (मध्य प्रदेश में जनजातियों का क्रांतिकारी आंदोलन) – काकोरी प्रतिशोध शताब्दी वर्ष समारोह संपन्नमहू। दिनांक 4 अक्टूबर 2024 को डॉ.बी. आर.अंबेडकर समाज विज्ञान विश्वविद्यालय महू एवं भेरूलाल पाटीदार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय महू दोनों के सामूहिक तत्वाधान में अंबेडकर विश्वविद्यालय में काकोरी (कांड)विमर्श एवं रानी दुर्गावती की 500वीं जन्म जयंती की
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सिख गुरुओं की राष्ट्रीय दृष्टि” पुस्तक लोकार्पण
- October 3, 2024
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सिख गुरुओं की राष्ट्रीय दृष्टि” पुस्तक लोकार्पण – सभ्यता अध्ययन केंद्र द्वारा सिख साहित्य के अनुपम विद्वान रहे स्व. राजेंद्र सिंह जी की लिखी तथा संकलित पुस्तक सिख गुरुओं की राष्ट्रीय दृष्टि नामक एक पुस्तक प्रकाशित की गई है। 04 सितंबर, 2024 को इसका लोकार्पण कार्यक्रम दयाल सिंह सांध्य महाविद्यालय में संपन्न हुआ। पुस्तक का
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वैद्य गुरुदत्त के साहित्य में राष्ट्रीय अस्मिता: संगोष्ठी (हंसराज महाविद्यालय)
- October 1, 2024
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वैद्य गुरुदत्त के साहित्य में राष्ट्रीय अस्मिता – सभ्यता अध्ययन केंद्र एवं हंसराज महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के सभागार में 28 अगस्त 2024 को दो महत्वपूर्ण आयोजन शृंखलाबद्ध थे। पहला था- वैद्य गुरु दत्त के साहित्य में राष्ट्रीय अस्मिता। इस आयोजन में “वैद्य गुरुदत्त का रचना संसार” विषय पर अखिल भारतीय
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काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष समारोह उद्घाटन कार्यक्रम
- September 30, 2024
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काकोरी विमर्श – सभ्यता अध्ययन केन्द्र द्वारा निश्चय किया गया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सशस्त्र क्रांति की धारा में मील के पत्थर के रूप में स्थापित काकोरी में अंग्रेजों द्वारा लूटे गए धन को ले जा रही ट्रेन पर हमले की घटना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर काकोरी प्रतिरोध शताब्दी समारोह
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सभ्यता अध्ययन केंद्र के 9वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्टी
- September 28, 2024
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सभ्यता अध्ययन केंद्र – डॉ आनंद वर्धन जी ने विशिष्ट वक्तव्य देते हुए कहा की पाश्चात्य इतिहासविद भारत के महान इतिहास को नकारते है,पाश्चात्य इतिहास उनके राजाओं के पराक्रम का इतिहास है तथा भारत मे भी ऐसे महान योद्धा/राजा हुए है सभ्यता अध्ययन केंद्र को ऐसे क्षत्रियों पर कार्य करना चाहिए जिन्होंने बाहरी आपदाओ से
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जनजातीय देव लोक और धार्मिक परंपराएं (दो दिवसीय संगोष्ठी)
- November 12, 2022
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यह सं गोष्ठी सेंटर फॉर सिविलाइजेशनल स्टडीज, इं दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला कें द्र (आईजीएनसीए), राँची तथा राँची विश्वविद्यालय द्वारा सं युक्त रूप से आयोजित की जाएगी। जनजातीय देव-लोक और धार्मिक परंपराए लिंक – Janjatiye Devlok Brochure-Nov-2022-final2
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राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर विराजमान होना हम सब के लिए गौरव की बात है।
- September 7, 2022
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संगोष्ठी के दूसरे दिन 7 अगस्त 2022 को संगोष्ठी की मुख्य अतिथि थी जनजातीय कार्यराज्यमंत्री श्रीमती रेणुका सिंह। मंच पर विराजमान थे डॉ. लक्ष्मण सिंह मरकम उपसचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय मध्यप्रदेश और श्री रविशंकर निदेशक सभ्यता अध्ययन केंद्र।मुख्य अतिथि श्रीमती रेणुका सिंह ने सत्र के औपचारिक शुभारंभ, स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के चित्र के सामने दीप
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भारत की एकात्मकता और जनजातीय संस्कृति पर संगोष्ठी का आयोजन
- September 2, 2022
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सभ्यता अध्ययन केंद्र और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त तत्वाधान में भारत की एकात्मता तथा जनजातीय संस्कृति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी नई दिल्ली के बसंत कुंज में इंटर यूनिवर्सिटी एक्सिलेरेटर सेंटर में आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक श्री राजकुमार भाटिया, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय में परामर्शदाता डॉ.
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भारतीय ज्ञान की पुनःस्थापना के लिए बौद्धिक क्षात्रत्व की जागृति ही विकल्प – मा. मोहन भागवत
- March 22, 2021
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ऐतिहासिक कालगणना पुस्तक का लोकार्पण संपन्न नई दिल्ली। भारत की मनीषा और उसके प्रतिहारों के जागरण के लिए बौद्धिक पराक्रम के महती आवश्यकता है। भारतीय ज्ञानलोक को जिसने भी पश्चिम की दासता से मुक्त करने का प्रयास किया उसे हाशिये पर खींच देने का सक्षम प्रयास किया गया। यह आवश्यक नहीं कि बौद्धिक पराक्रम दिखाने
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कैसे हुआ यूरोप में सनातन संस्कृति का पराभव
- December 18, 2020
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मुरारी गुप्ता यूरोप में भारतीय संस्कृति पर चल रही वेबिनार की दूसरी कड़ी में इस बार यूरोप में भारतीय संस्कृति के पराभव विषय पर वनवासी कल्याण आश्रम के विश्व विभाग प्रमुख मेजर सुरेंद्र नाथ माथुर (से.नि.) ने रुचिपूर्ण ढंग से स्लाइड के माध्यम से पूरी जानकारी दी। शुरुआत में उन्होंने विभिन्न तथ्यों और प्रमाणों के
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देश में आज सामान्य प्रसव दुर्लभ होता जा रहा है। सिजेरियन यानी पेट चीर कर प्रसव कराना अधिक सहज प्रतीत हो रहा है। प्रश्न उठता है कि सिजेरियन प्रसव का दूरगामी प्रभाव क्या है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए ही यह मातृत्व स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करके गूगल फार्म पर जाएं और अपने उत्तर तथा अनुभव हमसे साझा करें। यह सर्वेक्षण शुद्ध रूप से अकादमिक कार्य हेतु किया जा रहा है। यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारियां सर्वथा गोपनीय रहेंगी और शोध के अतिरिक्त उनका कोई अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा।