राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर विराजमान होना हम सब के लिए गौरव की बात है।
- September 7, 2022
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- Category: पूर्व-कार्यक्रम

संगोष्ठी के दूसरे दिन 7 अगस्त 2022 को संगोष्ठी की मुख्य अतिथि थी जनजातीय कार्यराज्यमंत्री श्रीमती रेणुका सिंह। मंच पर विराजमान थे डॉ. लक्ष्मण सिंह मरकम उपसचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय मध्यप्रदेश और श्री रविशंकर निदेशक सभ्यता अध्ययन केंद्र।मुख्य अतिथि श्रीमती रेणुका सिंह ने सत्र के औपचारिक शुभारंभ, स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
स्वागत सम्मान के बाद अतिथियों का वाणी से स्वागत करते हुए अपने बीजवक्तव्य में श्री रविशंकर ने इतिहास के उस पहलू पर विचार रखा, जिसमें जनजातियों के योगदान को भुला दिया गया। उस योगदान को उजागर करना इस संगोष्ठी के उद्देश्य है। सूचना विभाग के अधिकारी रितेश पाठक ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया l
संगोष्ठी के समापन दिवस के पहले सत्र में बोलते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय के उपसचिव डॉ लक्ष्मण सिंह मरकम ने कहा कि आज जब कुछ अलगाववादी तत्व व संगठनों द्वारा एक सोची-समझी साजिश के तहत मूलनिवासी के आड़ में जनजातीय व अन्य पिछड़े जनजातीय समाज के बीच में अलगाव का बीज बोया जा रहा है उन्हें गुमराह किया जा रहा है तो ऐसे में सभ्यता अध्ययन केंद्र एवं वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा उनको एक सूत्र में बांधने एवं भारतीय गौरव के रूप में उनके कार्यों को आगे लाने के लिए भारत की एकात्मता तथा जनजातीय संस्कृत पर आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी काफी प्रसांगिक है l
संगोष्ठी की मुख्य अतिथि केंद्रीय जनजाति कार्य राज्यमंत्री श्रीमती रेणुका सिंह ने कहा आज़ादी के अमृतमहोत्सव वर्ष में हमें बहुत बड़ा तोहफा मिला। राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रोपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर विरजमान होना हम सब के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा सरकारी योजनाओं में जनजाति समाज के लिए बहुत सी योजनाएं हैं हमें उन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए ताकि जनजाति समाज के उत्थान हो। भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनजाति मंत्रालय स्थापित किया। श्रीमती रेणु सिंह ने कई उल्लेखनीय विवरण प्रस्तुत किये। उन्होंने बताया देश मे 700 से अधिक जनजातियां है इनकी संख्या 10 करोड़ से अधिक है। वर्तमान में जनजाति कार्यमंत्रालय का बजट 87,000 करोड़ है जबकि 2014 में लगभग 19 करोड़ रुपये था। शिक्षा के क्षेत्र में आवासीय छात्रावासों के माध्यम से क्रन्तिकारी परिवर्तन समाज में आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक जड़ी बूटियों और अन्य कृषि उत्पाद हैं जिन्हें बंधन केंद्रों के माध्यम से बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा हैं। 27 राज्यो में जनजातीय शोध संस्थान केंद्र और अध्ययन की व्यवस्थाएं हैं। 20 हज़ार से अधिक वन अधिकार पत्र जारी किए गए है। प्रधानमंत्री आवास योजना जे 34 हज़ार से अधिक जनजाति के 34 हज़ार से अधिक लोगों को आवास मिल चुके हैं 2024 तक सभी इच्छुक आवेदन कर्ताओं को आवास दे दिए जाएंगे। देश मे जनजातीय क्ष्रेत्र में 1 करोड़ 72 हज़ार से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। 15 नवंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजाति गौरव दिवस मनाना शुरू किया।
श्रीमती रेणुका सिंह ने बताया सरकार ने निश्चय किया है कि 9 स्थानों पर जनजाति के स्वतन्त्रता सेनानियों की स्मृति में स्मारक और संग्रहालय स्थापित किये जा रहे हैं। श्रीमती रेणुका सिंह ने बताया कि कुछ लोग जनजाति वर्ग के हितों के दुरूपयोग कर रहे हैं, यह सरकार की दृष्टि में है। विगठन कारी शक्तियों के प्रति को जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत की एकात्मता तथा जनजाति संस्कृति पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की और संगोष्ठी की सफलता की शुभकामनाएं व्यक्त की।
‘आमचो बस्तर’ के लेखक डॉ राजीव रंजन प्रसाद, भूतपुर्व आइएएस श्याम सिंह कुमरे ने वनवासी समुदाय को विभाजित करने के षड्यंत्रों पर चर्चा करते हुए कहा कि इन षड्यंत्रों को यथाशीघ्र विफल करने की आवश्यकता है I
संगोष्ठी में स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय समाज का योगदान विषय पर केंद्रित सत्र में विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली संस्थान में विजिटिंग फैकल्टी श्री टी सी जेम्स, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ शैलेन्द्र कुमार, अमरकंटक केंद्रीय विश्वविद्यालय के अकादमिक बोर्ड सदस्य श्री नरेन्द्र मरावी, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हिताभिलाष मोहन्ती ने विचार व्यक्त किये।
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