यदि आपमें भारतीय दृष्टि से विश्व को देखने और जानने की इच्छा है, यदि आप भारतीय समस्याओं के लिए भारतीय समाधानों की तलाश में हों या आप विश्व की समस्याओं को जानना तथा समझना चाहते हों तो सेंटर फॉर सिविलाइजेशनल स्टडीज यानी सभ्यता अध्ययन केंद्र से जुड़िए। यदि आप अध्ययन तथा शोध में समय लगाना चाहते हों अथवा केंद्र के लिए आंशिक अथवा पूर्ण समय देना चाहते हों तो हमें फोन तथा ईमेल से संपर्क करें। अपना संक्षिप्त परिचय भेजें और अध्ययन में रुचि का विषय बताएं। यह सारा कार्य स्वैच्छिक तथा अवैतनिक होगा। केंद्र द्वारा संचालित शोध कार्यों में आपको शामिल किया जाएगा।
केंद्र द्वारा संचालित संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा कक्षाओं में आप शामिल हो सकते हैं। अपने यहाँ उनका आयोजन करवा सकते हैं। आप अपने स्थान पर सभ्यता अध्ययन केंद्र की शाखा का प्रारंभ कर सकते हैं। गोष्ठियों के विषय, उनके बिंदु, संदर्भित साहित्य और आवश्यकता होने पर वक्ता आदि आपको केंद्र द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। आपकी शाखा के अध्येताओं द्वारा किए गए अध्ययन और शोध निष्कर्षों को आलेख के रूप में केंद्र की वेबसाइट पर तथा पत्रिका सभ्यता संवाद में प्रकाशित किया जाएगा।
व्यक्ति से साथ-साथ विभिन्न शोध संस्थाएं भी केंद्र के साथ जुड़ सकती हैं। संस्थाएं अपना प्रोफाइल ईमेल करें और फोन पर संपर्क करें। साथ मिल कर हम किन विषयों में काम कर सकते हैं, यह भी सुनिश्चित करके हम मिल कर संगोष्ठियां, कार्यशालाएं और विविध विषयों की कक्षाओं का आयोजन कर सकते हैं।
सहयोगी बनें
सभ्यता अध्ययन केंद्र एक अलाभकारी संस्था है और यह समाज तथा शासन के सहयोग से कार्य करती है। आपके सहयोग से ही संस्था के शोध कार्यों का सफल संचालन संभव है। विश्व में भारतीय दृष्टि का विस्तार करने के लिए एक संस्था के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, इसके लिए आप सभी का आगे आना और सहयोग करना अत्यावश्यक है।
आप केंद्र की शोध परियोजनाओं को आर्थिक सहायता दे सकते हैं। हमारे शोधकर्ताओं को नई छात्रवृत्तियों तथा फेलोशिप प्रायोजित कर सकते हैं ताकि वे निश्चिंत होकर शोध और लेखन कर सकें। आपके द्वारा प्रायोजित छात्रवृत्तियों तथा फेलोशिप को आपके द्वारा संदर्भित नाम अथवा भारतीय विद्या के महान मनीषियों के नाम पर चलाया जाएगा।
विस्तार से जानने के लिए हमें फोन अथवा ईमेल करें।
सहयोग करें
इन कार्यों को गति प्रदान करने के लिए आप प्रबुद्ध लोगों के मार्गदर्शन और संरक्षण की महती आवश्यकता है। अतः आपसे निवेदन है कि केंद्र के वार्षिक संरक्षक सदस्य बन कर भारतहित में चल रहे इस ज्ञानयज्ञ में अपनी आहूति प्रदान करें और साथ ही भारतीय विमर्श खड़ा करने में हमारा सहयोग भी करें। सदस्यता शुल्क निम्नानुसार है। आपके द्वारा दी गई यह राशि 80 जी के तहत करमुक्त होगी।
वार्षिक सदस्यता शुल्क : 1000/-
आजीवन सदस्यता शुल्क : 11000/-
सभी सदस्यों को सभ्यता संवाद की प्रति निःशुल्क प्रेषित की जाएगी।
देश में आज सामान्य प्रसव दुर्लभ होता जा रहा है। सिजेरियन यानी पेट चीर कर प्रसव कराना अधिक सहज प्रतीत हो रहा है। प्रश्न उठता है कि सिजेरियन प्रसव का दूरगामी प्रभाव क्या है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए ही यह मातृत्व स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करके गूगल फार्म पर जाएं और अपने उत्तर तथा अनुभव हमसे साझा करें। यह सर्वेक्षण शुद्ध रूप से अकादमिक कार्य हेतु किया जा रहा है। यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारियां सर्वथा गोपनीय रहेंगी और शोध के अतिरिक्त उनका कोई अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा।