Center for Civilisational Studies सभ्यता अध्ययन केंद्र की स्थापना 30 अप्रैल, 2015 को दिल्ली में कुछ युवा जिज्ञासु अध्येताओं द्वारा एक पब्लिक चैरिटेबल ट्र्स्ट के रूप में की गई थी। इसके संस्थापक ट्र्स्टी श्री रवि शंकर, श्री सुबोध कुमार और श्री प्रवीण शुक्ला हैं। तब से संभ्यता अध्ययन केंद्र युवा शोधार्थियों को ढूंढ कर जोड़ने तथा उन्हें विभिन्न विषयों पर शोध हेतु प्रेरित करने, उन विषयों पर शोध-निष्कर्षों से आम जन को अवगत कराने हेतु संगोष्ठियां, कार्यशालाएं आदि आयोजित करने जैसी गतिविधियों में निरंतर संलग्न है।
शोध कार्यों को करने के लिए केंद्र के साथ युवा शोधार्थियों का एक अच्छा समूह है। इस समूह में राजनीतिक- सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी तथा जीवन के विभिन्न आयामों से जुड़े युवा शामिल हैं। इस समूह में इतिहास, राजनीतिशास्त्र, समाजविज्ञान, अर्थशास्त्र, विज्ञान, गणित, संस्कृत जैसे विविध विषयों के मर्मज्ञ भी हैं।
संस्था अपना कार्य संपादित करने के लिए अपने ट्रस्टियों तथा समाज के सहयोग पर निर्भर है। संगोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन सरकारी तथा गैरसरकारी सामाजिक सहयोग से किया जाता है।
देश में आज सामान्य प्रसव दुर्लभ होता जा रहा है। सिजेरियन यानी पेट चीर कर प्रसव कराना अधिक सहज प्रतीत हो रहा है। प्रश्न उठता है कि सिजेरियन प्रसव का दूरगामी प्रभाव क्या है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए ही यह मातृत्व स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करके गूगल फार्म पर जाएं और अपने उत्तर तथा अनुभव हमसे साझा करें। यह सर्वेक्षण शुद्ध रूप से अकादमिक कार्य हेतु किया जा रहा है। यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारियां सर्वथा गोपनीय रहेंगी और शोध के अतिरिक्त उनका कोई अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा।