B-14, Street No. 13
Village Wazirabad, Delhi-110084
Mon - Sat 8.00 A.M. - 06.00 P.M.
Sunday CLOSED
0
No products in the cart.

मार्गदर्शक मंडल*

1. श्री सुबोध कुमार

सभ्यता अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष श्री सुबोध कुमार वेदों के ख्यातिप्राप्त विद्वान और गौविज्ञान के अन्वेषक हैं। वेदों में गौ के विषय पर आपने गंभीर शोध किया है। मूलतः झेलम, वर्तमान पाकिस्तान के निवासी श्री सुबोध कुमार विभाजन के बाद भारत आ गए थे। 1955 में रूड़की से इंजीनियरिंग करने के बाद कुछ वर्ष नौकरी की। फिर अपना उद्योग प्रारंभ किया। संप्रति रामप्रस्थ, गाजियाबाद में रहते हैं और पूरा समय गौसेवा तथा वेदाध्ययन में लगाते हैं। महर्षि गौसंवर्धन केंद्र, गाजीपुर, आनंदविहार, गौशाला के कोषाध्यक्ष हैं।
वैदिक सूक्तों के उन्होंने अभिनव अर्थ किए हैं। वेदों के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान में गहरी पैठ है। उनकी एक पुस्तक साइंस इन वेदाज भारतीय धरोहर प्रकाशन से प्रकाशित हुई है।

3. प्रो. रामेश्वर प्रसाद मिश्र पंकज

प्रो. रामेश्वर प्रसाद मिश्र पंकज प्रसिद्ध दार्शनिक, इतिहासविद् और समाजशास्त्री हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के मानद प्रोफेसर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता. साहित्य समीक्षा एवं समाज संगठन का सुदीर्घ अनुभव है। वैश्विक संदर्भ में सत्य, ऋत एवं धर्म की प्रतिष्ठा के लिए कार्यरत हैं।

वे दो वर्षों तक भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में परामर्शदाता रहे हैं। राममनोहर लोहिया के साथ समाजवादी आंदोलन में काम किया है। दैनिक जेवीजी टाइम्स में सहायक संपादक रहे हैं। इसके अलावा साप्ताहिक दिनमान, मासिक गाँधी मार्ग आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में काम किया है। भारत भवन, भोपाल में वे न्यासी सचिव रहे हैं। निराला सृजन पीठ, संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश के निदेशक रहे हैं। गाँधी विद्या संस्थान, बनारस के निदेशक रहे हैं। धर्मपाल शोधपीठ, भोपाल के निदेशक रहे हैं।

प्रो. मिश्र ने अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन किया है। स्त्रीत्व, धारणाएं एवं यथार्थ, कभी भी पराधीन नहीं रहा है भारत, गौमाता, राष्ट्रीय विमर्श का आह्वान, अहिंसक समृद्धि, विश्व सभ्यता – भारतीय दृष्टि आदि उनकी कुछेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं।

2. डॉ. ओमप्रकाश पांडेय

डॉ. ओम प्रकाश पांडेय एक वरिष्ठ अंतरिक्षविज्ञानी हैं। डा. पांडेय का जन्म कोलकाता, पं. बंगाल में हुआ है और वहीं से उन्होंने भौतिकी में एमएससी किया। कोलकाता विश्वविद्यालय से ही उन्होंने कॉस्मोलोजिकल बिहैवियर इन फॉरमुलेटिंग गैलेक्टिक युनिवर्स में पीएचडी और कन्शसनेस, द सिम्पटम ऑफ अल्टीमेट एक्झिसटेंस पर डीएससी करने के बाद सृष्टिरहस्य संबंधी वैदिक विचार पर डीलिट किया।

डॉ. पांडेय ने वर्ष 1973 में कोलकाता विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य प्रारंभ किया और वर्ष 1980 में इसरो में विज्ञानी के नाते जुड़े। वर्ष 1990 में डॉ. पांडेय प्रधानमंत्री के विज्ञान एवं तकनीकी ओएसडी नियुक्त किए गए थे।

वर्ष 2000 में स्वतंत्र शोध करने के लिए डॉ. पांडेय ने इसरो से स्वैच्छिक अवकाश ले लिया। वर्ष 2001 में नासा में उन्होंने साउंड इनर्जी इक्वेशन पर पेपर प्रस्तुत किया और फिर वहां के अंतरिक्ष अनुसंधान प्रोग्राम में अतिथि व्याख्याता नियुक्त हो गए। वर्ष 2007-2008 में सर्न में हुए विशेष प्रयोग जिसमें हिग्स बोसोन को खोजने का दावा किया गया था, से भी डॉ. पांडेय जुड़े रहे।

अंतरिक्षविज्ञानी होने के साथ-साथ डॉ. पांडेय का भारतीय शास्त्रों का भी गहरा अध्ययन है। उन्होंने भारतीय दर्शन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक विज्ञान और भारतीय विज्ञान के तुलनात्मक अध्ययन किया है और भारतीय विज्ञान की श्रेष्ठता को सामने रखा है। वर्ल्ड बियांड क्वांटम, कॉस्मोलोजिकल बिहैवियर ऑफ नेचर, कन्शसनेस, द अल्टीमेट वोम्ब और द्रष्टव्य जगत का यथार्थ उनकी कुछेक प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।

4. प्रो. राजकुमार भाटिया
5. डॉ. आनंद बर्धन
6. श्री आशुतोष भटनागर
7. श्री दिलीप केलकर