पूर्व-कार्यक्रम
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सार्वभौम तथा चक्रवर्ती सम्राट ललितादित्य पर एकदिवसीय संगोष्ठी
- August 12, 2020
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No Commentsविगत 14 सितंबर, 2019 दिन शनिवार को सभ्यता अध्ययन केंद्र तथा जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में भारतीय अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर),नई दिल्ली में “विश्वविजेता सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड” विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देशभर से ललितादित्य और कश्मीर के विषय के अध्येता एकत्र हुए थे। कश्मीर का आविष्कार है -
कालगणनाः एक भारतीय दृष्टि पर एकदिवसीय संगोष्ठी
- July 12, 2020
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नई दिल्ली स्थित भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् में दिनांक 06 अप्रैल 2019 दिन शनिवार को सभ्यता अध्ययन केंद्र द्वारा ‘कालगणनाः एक भारतीय दृष्टि’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. नन्द किशोर गर्ग ने की, जिसके प्रमुख वक्ता प्रसिद्ध अंतरिक्ष विज्ञानी डॉ. ओम प्रकाश पांडेय -
जातीय सद्भाव : भूत, वर्तमान, भविष्य पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
- July 12, 2020
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गत 22 दिसम्बर, 2018 दिन शनिवार को नई दिल्ली के झंडेवालान एक्सटेंशन स्थित दीनदयाल शोध संस्थान के सभागार में सेंटर फॉर सिविलिजेशनल स्टडीज, दिल्ली द्वारा एकदिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया। इस सेमीनार का विषय था - जातीय सद्भाव : भूत, वर्तमान, भविष्य। इस सेमीनार में झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, -
मेकिंग मैथेमेटिक्स इजी : एन भारतीय वे पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
- July 12, 2020
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भारतीय दृष्टि से गणित के सरलीकरण के उपायों पर विस्तृत चर्चा करने के लिए 5 अगस्त, 2017 को बनारसी दास चांदीवाला के प्रांगण में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार सभ्यता अध्ययन केंद्र, भारतीय धरोहर और बनारसीदास चांदीवाला ट्रस्ट की परस्पर भागीदारी से आयोजित किया गया। इस आयोजन में बतौर अतिथि -
यूरोप : एक भारतीय दृष्टि पर दोदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला
- July 12, 2020
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यूरोप हमें आकर्षित करता है। छुट्टियां मनाने के लिए हमारे नेतागण यूरोप जाना पसंद करते हैं। हमारे नेता हमारे शहरों को यूरोपीय शहर बनाना चाहते हैं, नदियों को यूरोपीय नदियों की भांति साफ करना चाहते हैं। परंतु यह यूरोप की असली छवि नहीं है। यूरोप वास्तव में आज जैसा भी है, उसके वैसा बनने की
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देश में आज सामान्य प्रसव दुर्लभ होता जा रहा है। सिजेरियन यानी पेट चीर कर प्रसव कराना अधिक सहज प्रतीत हो रहा है। प्रश्न उठता है कि सिजेरियन प्रसव का दूरगामी प्रभाव क्या है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए ही यह मातृत्व स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करके गूगल फार्म पर जाएं और अपने उत्तर तथा अनुभव हमसे साझा करें। यह सर्वेक्षण शुद्ध रूप से अकादमिक कार्य हेतु किया जा रहा है। यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारियां सर्वथा गोपनीय रहेंगी और शोध के अतिरिक्त उनका कोई अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा।