यह पुस्तक मूलतः झारखंड के जनजातीय समाज की देवलोक सम्बन्धी अवधारणाओं तथा उनकी धार्मिक परम्पराओं विशेषकर कर्मकांड आदि पर केन्द्रित है। उल्लेखनीय है कि झारखंड में 32 जनजातियां निवास करती हैं। इन 32 जनजातियों में से कुछ प्रमुख जनजातियों के बारे में पर्याप्त साहित्य उपलब्ध होता है, परंतु सभी के बारे में नहीं। जिन जनजातियों के बारे में साहित्य उपलब्ध है, वह भी जनजातीय समाज के अपने विवरणों से अधिक यूरोपीय नृतत्त्वविज्ञानी विवरणों पर आधारित होता है। इस पुस्तक में लिखे गए आलेख जनजातीय समाज के अपने विवरणों पर आधारित हैं।
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इस पुस्तक मूलतः झारखंड के जनजातीय समाज की देवलोक सम्बन्धी अवधारणाओं तथा उनकी धार्मिक परम्पराओं विशेषकर कर्मकांड आदि पर केन्द्रित है। उल्लेखनीय है कि झारखंड में 32 जनजातियां निवास करती हैं। इन 32 जनजातियों में से कुछ प्रमुख जनजातियों के बारे में पर्याप्त साहित्य उपलब्ध होता है, परंतु सभी के बारे में नहीं। जिन जनजातियों के बारे में साहित्य उपलब्ध है, वह भी जनजातीय समाज के अपने विवरणों से अधिक यूरोपीय नृतत्त्वविज्ञानी विवरणों पर आधारित होता है। इस पुस्तक में लिखे गए आलेख जनजातीय समाज के अपने विवरणों पर आधारित हैं।




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