Original price was: ₹399.₹280Current price is: ₹280.
यह पुस्तक देश की एक प्रमुख समस्या मुस्लिम अलगाववाद के सच को उजागर करती है। पुस्तक में विद्वान लेखकों ने कुरान तथा हदीस के समुचित उद्धरणों से साबित किया है कि अल्पसंख्यक अधिकारों की मांग करने वाले लगभग सभी भारतीय मुसलमान कुरान के अनुसार सच्चे मोमिन हैं ही नहीं। वे वास्तव में मुनाफकीन हैं और कुरान के अनुसार दंड के भागी हैं।
इस्लाम की आड़ में अराजकता फैलाने वाले लोग स्वयं इस्लाम के आधारभूत स्तंभों का पालन नहीं करते। अतः स्वयं कुरान और हदीस के अनुसार उन्हें मोमिन नहीं कहा जा सकता। ये लोग तो छद्म यानी बनावटी मुसलमान हैं। इस्लाम इनके लिये अवैध कार्यों और गैरकानूनी आपराधिक कार्यों के लिये एक ढाल भर है, इन्हें स्वयं इस्लाम में आस्था नहीं है। ऐसे मुनाफकीनो का मस्जिद या इस्लाम की किसी भी चीज पर कोई हक मान्य नहीं है। कुरान के सूरा 9, आयत 17 और 18 में स्पष्ट कहा है कि – ‘यह मुशरिकों का कार्य नहीं है कि वे अल्लाह की मस्जिदों को आबाद करें और उसका प्रबंध करें।’
इस्लाम का नाम लेकर किसी व्यवस्थित और विधि द्वारा स्थापित शासन के कानूनों का उल्लंघन करना स्वयं इस्लाम को लांछित करने का प्रयास है और ऐसी मनमानी होने देना शासन के लिये भी उचित नहीं है। किसी को भी स्वयं अपने द्वारा घोषित अनुशासन का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।
देश की सांप्रदायिक समस्याओं को समझने का प्रयास करने वाले सभी शोधकर्ताओं को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।
Out of stock




देश में आज सामान्य प्रसव दुर्लभ होता जा रहा है। सिजेरियन यानी पेट चीर कर प्रसव कराना अधिक सहज प्रतीत हो रहा है। प्रश्न उठता है कि सिजेरियन प्रसव का दूरगामी प्रभाव क्या है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए ही यह मातृत्व स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करके गूगल फार्म पर जाएं और अपने उत्तर तथा अनुभव हमसे साझा करें। यह सर्वेक्षण शुद्ध रूप से अकादमिक कार्य हेतु किया जा रहा है। यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारियां सर्वथा गोपनीय रहेंगी और शोध के अतिरिक्त उनका कोई अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा।
There are no reviews yet.