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भारत और बांग्लादेश अलग नहीं हैं। वे हजारों वर्षों से सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से एक अखंड इकाई रहे हैं, लेकिन कट्टरपंथी राजनीतिक षड्यंत्रों के कारण यह विभाजन हुआ। आज बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। उनके लिए भारत और यहां का हिंदू समाज ही आशा की अंतिम किरण है। लेकिन दुर्भाग्यवश, भारत में भी इस सच्चाई की अनदेखी की जा रही है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने बांग्लादेश में हिंदुओं के संघर्ष, उनके अस्तित्व की लड़ाई और उन पर हो रहे अन्याय की वास्तविकता को उजागर करने का प्रयास किया है। इतिहास के जिन पन्नों को या तो दबा दिया गया या विकृत कर प्रस्तुत किया गया, उन्हें नए दृष्टिकोण से समाज के सामने रखा गया है। पुस्तक में बांग्लादेश में हिंदुओं की घटती जनसंख्या, मजहबी कट्टरता के बढ़ते प्रभाव और इसके भारत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह पुस्तक केवल घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि एक सामाजिक चेतना जागृत करने का प्रयास है।

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