श्री रवि शंकर
सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक श्री रवि शंकर एक वरिष्ठ पत्रकार, लेखक तथा शोधार्थी हैं। संप्रति भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की पत्रिका गगनांचल के संपादक हैं। साथ ही इंटरनैशनल सेंटर फॉर कल्चरल स्टडीज, भारत में अनुसंधान अधिकारी हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में सलाहकार रहे हैं। इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय में भारतीय कालगणना विषय के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के कोर्स कॉउन्सलर हैं।
मूलतः झारखंड के धनबाद शहर के निवासी हैं। रसायन शास्त्र से बीएससी ऑनर्स किया है। भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। जम्मू-कश्मीर अध्ययन में केंद्रीय विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश से तथा गाँधियन थॉट में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया है। सांगोपांग वेदविद्यापीठ गुरूकुल में संस्कृत का भी अध्ययन किया। पिछले 22 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं। भारतीय ज्ञान-विज्ञान जिसमें आयुर्वेद, कृषि, ज्योतिष आदि शामिल है, पर पिछले 15 वर्षों से अध्ययन, शोध और लेखन कर रहे हैं।
कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं। पहली पुस्तक है राष्ट्रवादी पत्रकारिता जो माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा प्रकाशित की गई है। दूसरी पुस्तक भारत में यूरोपीय यात्री: उद्देश्य, वर्णन और यथार्थ है जो महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय, बद्दी, हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रकाशित की गई है। तीसरी पुस्तक ऐतिहासिक कालगणना : एक भारतीय विवेचन सभ्यता अध्ययन केंद्र द्वारा प्रकाशित की गई है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक भारत वैभव में शोध परामर्शदाता रहे हैं और उसमें दो अध्यायों का लेखन भी किया है। गाय के आर्थिक, वैज्ञानिक, पर्यावरणीय आदि विभिन्न आयामों पर पाँच खंडों के शोध ग्रंथ का संकलन व संपादन किया है। चाणक्य पथ पुस्तक का संपादन और उसमें एक अध्याय का लेखन किया है, जो धरोहर प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है। साथ ही आयुर्वेद पर अनेक पुस्तकों का संपादन किया है।
देश में आज सामान्य प्रसव दुर्लभ होता जा रहा है। सिजेरियन यानी पेट चीर कर प्रसव कराना अधिक सहज प्रतीत हो रहा है। प्रश्न उठता है कि सिजेरियन प्रसव का दूरगामी प्रभाव क्या है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए ही यह मातृत्व स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करके गूगल फार्म पर जाएं और अपने उत्तर तथा अनुभव हमसे साझा करें। यह सर्वेक्षण शुद्ध रूप से अकादमिक कार्य हेतु किया जा रहा है। यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारियां सर्वथा गोपनीय रहेंगी और शोध के अतिरिक्त उनका कोई अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा।