- विश्व के इतिहास, संस्कृति, दर्शन, राजनीति और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का मौलिक संदर्भों और प्राथमिक स्रोतों से अवलोकन और विश्लेषण करना।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को सही दृष्टिकोण से समझना और उनके समाधान खोजना।
- अंतर – पांथिकसामंजस्य को बढ़ावा देना।
- प्रमुख विश्व सभ्यताओं के प्रमुख तत्वों – संगीत, नृत्य, नाटक, मूर्तिकला, वास्तुकला, चित्रकला, भाषा, परंपराएं, दैवीयता, दर्शन, तत्वमीमांसा, शास्त्र, कहानियों का दस्तावेजीकरण।
- मरणासन्न और उभरती हुई सभ्यताओं की पहचान और वर्गीकरण।
- विश्व की प्रमुख सभ्यताओं के सामान्य और समन्वयकारी तत्वों का अध्ययन।
- व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक-राजनीतिक-मानसिक-आर्थिक विकास और वैश्विक शांति और समृद्धि के साथ सभ्यतागत संबंधों का मूल्यांकन।
- डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विश्व स्तर पर शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए जन जागरूकता।
- भारतीय ज्ञान प्रणाली का अध्ययन और विश्व समृद्धि के लिए इसके संभावनाओं का आकलन।

देश में आज सामान्य प्रसव दुर्लभ होता जा रहा है। सिजेरियन यानी पेट चीर कर प्रसव कराना अधिक सहज प्रतीत हो रहा है। प्रश्न उठता है कि सिजेरियन प्रसव का दूरगामी प्रभाव क्या है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए ही यह मातृत्व स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करके गूगल फार्म पर जाएं और अपने उत्तर तथा अनुभव हमसे साझा करें। यह सर्वेक्षण शुद्ध रूप से अकादमिक कार्य हेतु किया जा रहा है। यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारियां सर्वथा गोपनीय रहेंगी और शोध के अतिरिक्त उनका कोई अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा।