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मेकिंग मैथेमेटिक्स इजी : एन भारतीय वे पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

भारतीय दृष्टि से गणित के सरलीकरण के उपायों पर विस्तृत चर्चा करने के लिए 5 अगस्त, 2017 को बनारसी दास चांदीवाला के प्रांगण में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार सभ्यता अध्ययन केंद्र, भारतीय धरोहर और बनारसीदास चांदीवाला ट्रस्ट की परस्पर भागीदारी से आयोजित किया गया। इस आयोजन में बतौर अतिथि शामिल हुए चंद्रकांत राजू। मुम्बई आईआईटी के प्रोफेसर रहे श्री राजू गणित के प्रकांड विद्वान हैं और भारतीय गणित में उनकी गहरी रुचि है। भारतीय गणित को उसकी गरिमा और विश्व कल्याण के लिए उसकी प्रतिष्ठा को स्थापित करने की तड़प का प्रमाण हैं उनकी रचनाएं। शुल्ब सूत्र के परिप्रेक्ष्य में रज्जू गणित पर किताब लिखकर उन्होंने भारतीय गणित की सहजता का बोध कराया है। साथ ही वे विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से भी भारतीय गणित के रहस्यों पर प्रकाश डाल रहे हैं और गणित में कालांतर में घुस आए व्यर्थ की पेचदीगियों को दूर करने के लिए आंदोलनरत हैं। दूसरे वक्ता के रूप में उपस्थित थे प्रो. भूदेव शर्मा। दिल्ली विश्वविद्यालय के गणित विभाग के पूर्व प्रोफेसर रहे प्रो. शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय में 14 वर्ष तक अध्यापन करने के बाद 29 वर्ष तक विदेश में रहे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका, वेस्टइंडीज आदि देशों में शिक्षण किया। उन्होंने गणित पर 23 पुस्तकों की रचना की है और उन्हें 28 शोधार्थियों को गणित में पीएचडी कराने का गौरव प्राप्त है। कार्यक्रम के तीसरे वक्ता के रूप में शामिल हुए प्रो. के रामसुब्रमण्यम। वर्ष 2008 में राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले महर्षि बादरायण व्यास सम्मान से अलंकृत प्रो. सुब्रमण्यम गणित के ज्ञाता होने के साथ ही संस्कृत के भी विद्वान हैं। वे मुम्बई आईआईटी के प्रोफेसर हैं और वर्तमान में इंटरनेशनल विजन फॉर हिस्ट्री एंड फिलॉसफी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सदस्य हैं। इस कार्यक्रम के चौथे वक्ता रहे इंजीनियर वेणुगोपाल। उन्होंने इंजीनियरिंग को अपनी वृत्ति और गणित को प्रवृत्ति समझते हुए पूरा जीवन बिताया और अब तक गणित पर कई पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। कार्यक्रम में वैदिक गणित के शोधार्थी राकेश जी ने भी अपने अनुभव को श्रोताओं के समक्ष साझा किया। इस कार्यक्रम में बनारसी दास चांदीवाला ट्रस्ट के सचिव डॉ. भूवन मोहन, प्रख्यात चिंतक और राजनेता रहे श्री के. एन. गोविंदाचार्य, राज्यसभा सदस्य श्री बसवराज पाटिल, भारतीय धरोहर पत्रिका के चेयरमैन व स्टील बर्ड ग्रुप के चेयरमैन श्री रमेश कपूर, भारतीय धरोहर पत्रिका के मुख्य संपादक श्री विजय शंकर तिवारी आदि ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराकर कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ किया गया। श्री रवि शंकर जी, श्री अलंकार जी, श्री अजीत जी, श्री ऋतेश पाठक जी ने मंच संचालन की जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

कार्यक्रम की भूमिका का अनावरण करते हुए प्रो. सी के राजू ने विद्यार्थियों के लिए एक भयावह विषय बन चुकी गणित पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार से प्रत्यक्ष को प्रमाण न मान कर इसकी जटिलता को बढ़ाने का कार्य किया गया है। उन्होंने रेखागणित का उदाहरण लेकर बताया कि जहां, एक ओर शुल्ब सूत्र में सुतली के प्रयोग से समस्त रेखागणित को समझा और जाना जा सकता है, वहीं एक अनजाना और अपरिचित यूक्लिड नाम के व्यक्ति के सिद्धांत के कारण इसे जटिल कर दिया गया है। इसे समझने के लिए उन्होंने स्वरचित पुस्तक रज्जू गणित का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने श्रोताओं से सीधा संवाद करते हुए बहुत ही प्रभावशाली ढंग से श्रोताओं के शंकाओं का निवारण किया। उन्होंने गणित और मैथमैटिक्स के अंतर को आसान शब्दों में स्पष्ट किया। उन्होंने आज की गणित के सार्वभौमिक (यूनिवर्सल) होने का खंडन किया और इसे औपचारिक (फॉर्मल) गणित करार दिया। उन्होंने गणित की उपादेयता बताते हुए कहा कि गणित से मैथमैटिक्स आसान और विज्ञान बेहतर हो जाता है। उनके मार्गदर्शन में देश और विदेश में भारतीय गणित पर किए जा रहे शोध और व्यावहारिक कार्यों की चर्चा की और इसे भारतीय शिक्षण पद्धति में शामिल कराने की अपनी भावी योजना पर अपने विचार साझा किए।

प्रो. भूदेव शर्मा ने अपने संबोधन में आधुनिक गणित की कठिनाइयां और उपनिवेशवाद से मुक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वविद्यालयों में गणित के विभाग की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने श्रोताओं से सीधे प्रश्न लेकर उसके जवाब में गहरी रुचि दिखाई और वर्षों के अपने मूल्यवान अनुभवों से श्रोताओं को लाभान्वित किया। उन्होंने मांटे कार्लो मेथड का जिक्र किया जिसके माध्यम से गणित के प्रश्नों का आसान हल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अथर्व वेद में आज के गणित के सिक्वेंस एंड सीरीज की चर्चा मिलती है। प्रो. के. राम सुब्रमण्यम एवं इंजी वेणुगोपाल ने भारतीय गणित की उपयोगिता और व्यावहारिक प्रयोग पर प्रकाश डाला। प्रो. सुब्रमण्यम ने त्रिकोणमिति की चर्चा की। उन्होंने मानव शुल्ब सूत्र के श्लोक 10.10 का उल्लेख करते हुए त्रिकोण के आधार, लंब और कर्ण के बीच के संबंध के बारे में बताया। इंजीनियर वेणुगोपाल ने ब्रह्मगुप्त में वर्णित साइक्लीक क्वाड्रीलेटरल, भाष्कर, नारायण दत्त और भाष्कर प्रथम के माध्यम से भारतीय गणित की सरलता पर चर्चा की। उन्होंने प्रोबेवलिटी के प्रश्नों को प्रत्यक्ष प्रदर्शन से समझाने की कोशिश की।

सभी वक्ताओं ने अपने विचारों के स्पष्टीकरण के लिए पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन की भी सहायता ली। इस एकदिवसीय सेमिनार में गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा के नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं से संबद्ध लोग उपस्थित हुए। इस सेमिनार को गणित के शोधार्थियों और आईएएस कोचिंग संस्थाओं के डायरेक्टरों ने अपने उत्साहवर्द्धक भागीदारी से चर्चा को सार्थकता प्रदान की।